आईबीएस क्या है? कारण, लक्षण और इलाज IBS kya hai ? Karan lakshan aur ilaj 2025

परिचय

इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) एक पाचन तंत्र से जुड़ा विकार है। यह ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को पेट दर्द, गैस, कब्ज, दस्त या दोनों का बार-बार अनुभव होता है। हालांकि IBS कोई गंभीर या जानलेवा रोग नहीं है, लेकिन यह व्यक्ति के दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। भारत में भी हर 5 में से 1 व्यक्ति कभी न कभी इस समस्या से प्रभावित होता है, खासकर युवा और महिलाएं।

IBS के मुख्य कारण

IBS के कारण आज भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कई कारणों से उत्पन्न होता है। कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

  1. आंतों की असामान्य गति: कुछ लोगों की आंतें भोजन को बहुत तेज़ गति से बाहर निकालती हैं, जिससे दस्त की समस्या होती है, जबकि कुछ की आंतें बहुत धीरे काम करती हैं, जिससे कब्ज हो जाता है। नोट – कई लोग मोटे होने के लिए चूर्ण या दवा खाते है जिससे आंतो की गति धीमी या तेज हो जाती है।
  2. मस्तिष्क और आंतों के बीच संचार में गड़बड़ी: मस्तिष्क और आंतों के बीच जब संचार सही नहीं होता, तो आंतें अधिक संवेदनशील हो जाती हैं और सामान्य गैस या भोजन पर भी प्रतिक्रिया देने लगती हैं। नोट – over thinking और हमेशा डर मे बने रहना जिससे संचार मे गड़बड़ी हो जाती है और आत असामान्य व्यवहार करने लगती है
  3. मानसिक तनाव और चिंता:लंबे समय तक तनाव में रहना IBS को जन्म दे सकता है या उसके लक्षणों को और बढ़ा सकता है। यह देखा गया है कि तनावग्रस्त व्यक्ति में IBS के लक्षण अधिक तीव्र हो जाते हैं।
  4. पूर्व में हुए संक्रमण या एंटीबायोटिक्स का असर:कभी-कभी पुराने पाचन तंत्र संक्रमण या अत्यधिक एंटीबायोटिक का सेवन भी आंतों की सामान्य कार्यप्रणाली को बाधित कर देता है।

आईबीएस के लक्षण:

IBS के लक्षण व्यक्ति से व्यक्ति भिन्न हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

  1. पेट में मरोड़, ऐंठन या दर्द (खासकर भोजन के बाद)
  2. बार-बार दस्त आना या लंबे समय तक कब्ज रहना
  3. मल त्याग में असामान्यता (बहुत पतला या कठोर मल)
  4. शौच के बाद भी पूरी तरह पेट साफ न लगना
  5. गैस बनना और पेट फूलना
  6. कभी-कभी मल में बलगम आना

IBS के लक्षण कई हफ्तों या महीनों तक बने रह सकते हैं और इनकी तीव्रता समय-समय पर बदलती रहती है।

जाने GERD क्या है click

आईबीएस का रोग पहचान कैसे किया जाता है?

सामान्यत: इसका कोई परीक्षण टेस्ट नही होता है जब आंत (पेट) असामान्य व्यवहार करे और सामान्य चिकित्सा द्वारा सही न हो और endoscopy द्वारा कुछ diagnoss न हो तो चिकित्सक द्वारा इसे ibs कहा जाता है

आईबीएस का इलाज:

IBS का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। इलाज का मुख्य आधार जीवनशैली में सुधार और आहार परिवर्तन होता है

आहार में बदलाव:

  1. Low-FODMAP Diet: इसमें ऐसे खाद्य पदार्थ कम किए जाते हैं जो आंतों में गैस बनाते हैं।
  2. अधिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ लें (अगर कब्ज होता है)
  3. मसालेदार, तले-भुने और प्रोसेस्ड फूड से बचें

तनाव प्रबंधन:

  1. योग, प्राणायाम और ध्यान जैसी तकनीकें बहुत प्रभावी होती हैं खासकर अनुलोम विलोम जिससे शत प्रतिशत फायदा होता है दवा की जरूरत ही नही पड़ेगी।
  2. पर्याप्त नींद और संतुलित दिनचर्या बनाएं

Ibs के लिए दवाएं

  1. एंटीस्पास्मोडिक दवाएं (पेट दर्द के लिए)
  2. प्रोबायोटिक्स (आंतों की सेहत के लिए)
  3. दस्त या कब्ज के अनुसार अलग-अलग दवाएं

निष्कर्ष

आईबीएस एक दीर्घकालिक लेकिन प्रबंधनीय स्थिति है। इसका इलाज लक्षणों पर आधारित होता है और हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। यदि आप बार-बार पेट संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो इसे हल्के में न लें और किसी गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट से परामर्श लें। समय रहते उचित आहार, तनाव नियंत्रण और दवाओं से IBS को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन को सामान्य रूप से जिया जा सकता है।

नोट

हो सके तो डॉक्टर के पास जाना ही न ऐसी पड़े कोशिश करे नही तो दवाओ का चक्र चलता रहता है अनुलोम विलोम को आधा घंटे करे और सुबह 5 बार हनुमान चालीसा का पाठ करे जरूरत पड़े तो डॉक्टर सलाह से दवाये ले और उसे संजीवनी बूटी की तरह खाय

2 thoughts on “आईबीएस क्या है? कारण, लक्षण और इलाज IBS kya hai ? Karan lakshan aur ilaj 2025”

Leave a Comment